Monday, October 7, 2019

श्री वैष्णव देवी दरबार यात्रा (इतिहास और पथ प्रदर्शिका)

श्री वैष्णव देवी दरबार यात्रा-

वैष्णव देवी दरबार


वैष्णवी माता कटरा से लगभग 14.5 किलोमीटर ऊपर समुद्र सतह से 5200 फीट की ऊँचाई पर त्रिकूट पर्वत की घाटी की सुन्दर गुफा में महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती पिण्डी रूप में निवास कर भक्तों की मनोकामना पूर्ण कर रही है |

यात्रा का समय-

सामान्य रूप से श्रद्धालु यात्री-गणपूरे वर्ष भर माता वैष्णों के दर्शन के लिए आते हैं। परन्तु आश्विन व चैत्र मास की नवदुर्गाओं या नवरात्रों में यात्रा करने का विशेष महात्म माना गया है। जनवरी एवं फरवरी में हिमपात होने से मार्ग कठिन हो जाता है। अत: इन दो महीनों में छोटे बच्चों व बूढ़ों को साथ लेकर यात्रा करना उचित नहीं रहता। नवयुवकों के लिए तो सभी मौसम उपयुक्त हैं। चैत्र व आश्विन के नवरात्रों (मार्च-अक्तूबर ) में सपरिवार यात्रा बड़ी सुविधा से की जा सकती है। इन दिनों मौसम भी सुहावना होता है।

यातायात-


(1) जम्मू तक यात्री देश के विभिन्न भागों से बस या रेल द्वारा पहुंचते हैं। जम्मू से कटरा के लिए लगभग हर आधे घण्टे या एक घण्टे बाद बसें चलती रहती हैं। किराया 25 रुपए प्रति व्यक्ति है। डीलक्स बस का किराया 35 रु० प्रति व्यक्ति है। इनको लगभग किराया मानें, चूंकि परिवर्तन कभी भी हो सकता है। 

(2) जम्मू से कटरा के लिए टैक्सी भी उपलब्ध है। चार व्यक्तियों का टैक्सी किराया 300 रु० है। पहले तय करना
उचित रहता है।

(3) कटरा से पहाड़ी मार्ग पैदल शुरू होता है। डाँडी, घोड़े खच्चर व कुली (पिट्ट) निर्धारित किराए पर मिल सकते है।

कटरा-

समुद्र तल से लगभग 2500 फीट की ऊँचाई पर, त्रिकूट पर्वत के चरणों में बसी यह सुन्दर बस्ती श्री वैष्णव देवी यात्रा का आधार रूप है। कटरा से दरबार तक 14.5 किलोमीटर की दरी रह जाती है, जो प्रत्येक यात्री को पैदल अथवा घोडे आदि पर तय करनी होती है। मार्ग में स्थान-स्थान पर प्याऊ बील) आदि लगी हुई हैं। सरकार की ओर से नल का भी लन्ध है। पूरे मार्ग में बिजली के प्रकाश का प्रबन्ध है, फिर रात को यात्रा करते समय टार्च आदि रखना आवश्यक है। 

कटरा में एक ही लम्बा बाजार है, जहाँ दैनिक उपयोग व यात्रा सम्बन्धी लगभग सभी वस्तुएँ उपलब्ध हैं। खाने-पीने के लिए कई होटल व ढाबे आदि हैं जहाँ उचित मूल्य पर अच्छा खाना मिलता है।
ठहरने के लिए कटरा में कोई कठिनाई नहीं है। कई धर्मशालाएँ, होटल व प्राईवेट हाऊस हैं। इसके अतिरिक्त टूरिस्ट विश्रामगृह भी बने हुए हैं। मुख्य धर्मशालाएँ-धर्मार्थ सराय, चिन्तामणि ट्रस्ट, दिल्ली वाली सराय, श्रीधर सभा सराय। टूरिस्ट रिसेप्शन सैंन्टर में अतिरिक्त सामान आदि भी प्रति नग के हिसाब से जमा किया जा सकता है। कटरा में रघुनाथ मन्दिर व चिन्तामणि मंदिर दर्शनीय है।

आवश्यक सूचनाएं-

  •  वैष्णव देवी दरबार जाने वाले प्रत्येक यात्री के लिए कटरा से "यात्रा-पर्ची" प्राप्त करना अनिवार्य है। यात्रा-पर्ची, बस स्टैंड पर ही स्थित, टूरिस्ट रिसेप्शन सैंटर कटरा में, सुविधा से मिलती है। इसके लिए कोई शुल्क नहीं देना होता। यात्रा पची के बिना यात्रियों को बाण गंगा से वापिस आना पड़ता है। भवन पर पहुंचकर यही पर्ची दिखाकर पवित्र गुफा में दर्शन के लिए नम्बर मिलता है।


  • चमड़े के जूते पहनकर पहाड़ी यात्रा नहीं करनी चाहिए। धार्मिक भावना से भी कपड़े अथवा रबड़ के जूते ही उचित हैं कटरा में कई दुकानों से उचित किराए पर कपड़े के जूते सुविधा से मिल जाते हैं। नये भी खरीद सकते हैं।

  • यात्रा सादगी एवं पवित्रता के साथ करें। यात्रा में मद्य,मांस व किसी भी प्रकार का नशा वर्जित है।

  • वर्षा ऋतु में छाता या बरसाती आदि लेना चाहिए। बांस की छड़ी, सूखे मेवे, बिस्कुट, भेंट की सामग्री (नारियल, चोले, चुन्नी, ध्वजा, छत्र, पान-सुपारी आदि) थरमस, चूर्ण, टार्च, कैमरा-दूरबीन ( यदि इच्छा हो) साथ ले जाना चाहिए। यह सब वस्तुएँ कटरा में सुविधा से उचित मूल्य पर मिल जाती हैं। छड़ी कैमरा व टार्च आदि कटरा की दुकानों से किराये पर भी मिलते हैं

  • रेजगारी (कटरा से दरबार तक स्थान-स्थान पर छोटी- छोटी कन्याओं को बांटने तथा मन्दिरों आदि पर चढ़ाने के लिए) साथ रखें। कटरा की दुकानों से रेजगारी मिल जाती है।
  • गुफा से निकलने वाले पवित्र जल को प्रसाद रूप में। साथ लाने के लिए कोई शीशी या बर्तन साथ ले जावें।एक ही दिन में पूरी यात्रा न कर सकने वाले यात्री आदि- कुमारी नामक स्थान पर विश्राम कर सकते हैं। यह स्थान लगभग आधे रास्ते में है। आदिकुमारी तथा वैष्णो देवी दरबार दोनों ही स्थानों पर कम्बल, दरी, स्टोव तथा खाना बनाने के बर्तन आदि मूल्य जमा कराने पर निःशुल्क उपयोग के लिए मिल जाते हैं। वस्तुओं को लौटा देने पर जमा किया हुआ धन वापिस मिल जाता है। यह प्रबन्ध धर्मार्थ संस्थाओं की ओर से किया गया है।



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