Sunday, October 13, 2019

माता वैष्णो देवी की तीन पिण्डियों का रहस्य

 देवी की तीन पिण्डियों का रहस्य

माता वैष्णो देवी आदिशक्ति का दूसरा नाम है, जिनका  अवतरण असुरों ( राक्षसों) के संहार के लिए, देवताओं की  सामूहिक शक्ति द्वारा हुआ था। महाबली असुर रम्भ के पुत्र   महिषासुर के अन्याय और आतंक से पीड़ित इन्द्रादि देवता ब्रह्मा और शिव के नेतृत्व में बैकुण्ठ में विष्णु के पास जाकर  जब संकट से छुटकारा दिलाने की प्रार्थना करने लगे, तो भगवान विष्णु ने ज्ञान-दृष्टि से जान लिया कि महिषासुर की। मृत्यु केवल एक नारी के द्वारा ही सम्भव है।

देवताओं द्वारा स्तुति करने पर एक नारी की उत्पत्ति हुई जो वैष्णवी कहलाई। ब्रह्मा के अंश से महासरस्वती, विष्णु के अंश से महालक्ष्मी तथा शिव के अंश से महाकाली कहलाई। गुफा में तीन पिण्डियाँ इन तीन देवी रूपों का प्रतीक हैं और इन तीन स्वरूपों का संयुक्त नाम है वैष्णवी। ऊपर से भिन्न- भिन्न दिखाई देने पर भी इन तीनों में कोई भेद नहीं है। इसी कारण माता वैष्णो देवी की गुफा में विराजमान तीन पिण्डियों का रूप मंच के ऊपर तो अलग-अलग दिखाई दे रहा है, परन्तु मंच के नीचे यह पिण्डियाँ एक हो गई हैं, जो कि मारी-स्वरूप

पराशक्ति की ये तीन आदिम विकृतियाँ आध्यात्मिक रूप से इच्छाशक्ति, ज्ञानशक्ति और क्रियाशक्ति का प्रतीक हैं, क्योंकि संसार में इच्छा, ज्ञान और क्रिया के बिना कोई भी कार्य सम्पन्न नहीं हो सकता। भगवान विष्णु की तरह आदिशक्ति वैष्णवी ने के इन अवतारों का मुख्य प्रयोजन देवताओं का उपकार, लोक-कल्याण, असुरनाश, भक्तों को अभय तथा धर्म की रक्षा बताया गया है।

माता वैष्णो देवी

त्रिशक्तितत्व-माता वैष्णो देवी

यह कौन नहीं जानता कि तीन-तत्व, तीन-शक्ति, तीन- देव, तीन-काल, तीन-अवस्था और तीन-लोक में सम्पूर्ण सष्टि -समाविष्ट है। अतः कहा जा सकता है कि माता वैष्णो देवी सम्पूर्ण सृष्टि की शक्ति (अधिष्ठात्री देवी) है। सनातन धर्म का एक ही परमात्मा है, जो निर्गुण और निर्लिप्त है, अपनी त्रिगुणात्मक शक्ति से सम्पन्न होकर ही जगत की रचना, पालन और संहार करने में समर्थ होता है... कार्यभेद से-ब्रह्मा, विष्णु और रुद्र-इन तीनों मूर्तियों को धारण करता है, और जिन तीन प्रकार की शक्तियों से यह देव सामर्थ्यवान् होते हैं, उन्हीं का नाम महासरस्वती, महालक्ष्मी और महाकाली है। सिद्धान्त रूप से यही मानना होगा कि इन तीनों शक्तियों के बिना संसार का कोई अस्तित्व नहीं। संहार, पालन और रचना के लिए क्रमश: भयंकर बल, पर्याप्त स्वर्ण (धन) और स्वच्छ विद्या (ज्ञान) की आवश्यकता होती है, इसीलिए तीनों शक्तियों (पिण्डियों) के स्वरूप भी क्रमश: काली, पीली और सफेद आभा से युक्त हैं।

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